अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में विप्लव जी की रचनाएँ-

गीतों में-
गोधूलि निकट
गोधूलि वेला
जीवन की शाम
झरनों जैसे बैन
रूह चाहती गात
 

  रूह चाहती गात 
 
जीवन मरण बिसात पर बोल रहे शह मात
साँस साँस जकडे रहे
हतप्रभ, रुके बलात

स्वप्न शेष आँखों में सोई लगती प्रात
गोधूलि कहे 'रुक लो' शाम थामती हाथ
बुला रही उस ओर को वह रहस्य सी रात   
द्विविधा, संशय, भ्रम है
किसकी माने बात
 
प्रतिपल पीछे अनंत है हर क्षण पीछे कथ्य
जीवन कथा ज्वलन्त है क्या इसके नेपथ्य
घड़ी अचानक चुप  हो किस्से खत्म हठात
भोग रहे सपनों को
रूह चाहती गात

१ अप्रैल २०२३

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter