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अनुभूति में कुमार लव की रचनाएँ-

क्रांति
नया सवेरा
बुरा जो देखन मैं चला
शून्यता
सुरक्षा
सेतु पर
हूँ शायद

 

 

सेतु पर

नीली दीवारों के बीच
नरगिसी फूलों के साथ
हर रात,
कैद हो जाती हूँ
एक सेतु पर
दो दुनियाओं के बीच।

हर रात,
पूरे संकल्प के साथ,
चादर ओढ़ कर
खुदसे कहती हूँ,
सोना पड़ेगा-
दिन भर काम करने के लिए,
खुदको स्वस्थ रखने के लिए,
वरना...  

१२ मई २००८ 

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