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अनुभूति में कुमार लव की रचनाएँ-

क्रांति
नया सवेरा
बुरा जो देखन मैं चला
शून्यता
सुरक्षा
सेतु पर
हूँ शायद

 

 

 

शून्यता
सागर किनारे
सूरज को देख रहा था,
और वह डूब गया।
मैं हड़बड़ा कर खडा हुआ,
फ़िर सूरज दिखा-
पर फ़िर से डूब गया!

रह गया-
खाली आसमान।

१२ मई २००८ 

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