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मुश्किल

बडा आसाँ है बतलाना
कि तुमको चाहते हैं हम
बङा मुश्किल ये समझाना
कि हमको भी सराहो तुम

सदा से मैं समर्पित तुमको
तनमन करती आई हूँ
कभी तो नेह की कलियाँ
मेरे पथ में बिछाना तुम

बड़ा आसाँ है बतलाना
कि तुमको चाहते हैं हम
बङा मुश्किल ये समझाना
कि हमको भी सराहो तुम

नहीं केवल कली सुरभित
कि जिसको भ्रमर बनो भोगो
कभी तो बाल कौतुहल ले
मेरी बाहों में आना तुम

बड़ा आसाँ है बतलाना
कि तुमको चाहते हैं हम
बङा मुश्किल ये समझाना
कि हमको भी सराहो तुम

३१ मार्च २००८

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