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अनुभूति में बद्रीनारायण की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
कौन रोक सकता है
दिल्ली जाना है
पहाड़ की चढ़ाई
माँ का गीत
राष्ट्रीय कवि

 

दिल्ली जाना है

न उड़न खटोला लगा है
न खड़ा है सारथी रथ लेकर तैयार
नहीं मेरे पास कोई योग साधना है
कि कुण्डलिया जगाऊँ और दिल्ली पहुँच जाऊँ
नहीं मेरे पास कोई बड़ा कनेक्शन है
कि दलाल खड़ा हो ले जाने को तैयार

मुझे तो टिकट कटाकर, रिजर्वेशन कराकर
दिल्ली जाना है

मैं हर महीने के अन्त में सोचता हूँ दिल्ली जाने के बारे में
और फिर सोच को करता हूँ निरस्त
यह जानते हुए भी कि आजकल दिल्ली जाना
सफलता की जरूरी शर्त है।
 

२९ जुलाई २०१३

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