अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
पुराने अंकसंकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में गौरीशंकर आचार्य ‘अरुण’ की रचनाएँ -

अंजुमन में-
अच्छी सी कुछ बात करें
और दिन आए न आए
दरिया तो वही है
धूल काफी जमा है
नहीं कभी भी ऐतबार हुआ
हम समंदर के तले हैं

 

नहीं कभी भी ऐतबार हुआ

उनको हम पर नहीं कभी भी ऐतबार हुआ।
शक हुआ इस कदर हुआ के बार-बार हुआ।

गरेबां चा.क ही होता तो उसे सी लेते,
हुआ तो इस .कदर हुआ के तार-तार हुआ।

ब.कौल उनके वो खंजर तो नहीं था गुल था,
पता नहीं कि वो कैसे जिगर के पार हुआ।

इस तमाशे का असर हो भी तो आखिर कैसे,
मेरी आँखों के ये आगे हजार बार-बार हुआ।

२७ दिसंबर २०१०

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter