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अनुभूति में कुंवर बेचैन की रचनाएँ—

हाइकु में-
वर्षा हाइकु

गीतों में—
ओ बासंती पवन

दोहों में—
नौ दोहे

अंजुमन में—
अंगुलियाँ थाम के
कफ़न बाँधकर
करो हमको न शर्मिंदा
खुद को नज़र के सामने
दो दिलों के दरमियाँ
दोनों ही पक्ष
धुआँ
नीर की गठरी
प्यासे होंठों से
फिर युधिष्ठिर को पुकारा
बीती नहीं है रात
मत पूछिए

 

बीती नहीं है रात

बीती नहीं है रात ज़रा और बात कर
होगा नया प्रभात ज़रा और बात कर

बातें रुकीं तो नींद उतरती है आँख में
होती है वारदात ज़रा और बात कर

सुनने को तुझे आज फिर उठ कर खड़ी हुई
यह सारी कायनात ज़रा और बात कर

अब ज़िंदगी की मौत से बाहर निकल के आ
मिल जाएगी हयात ज़रा और बात कर

चर्खे पै बर्फ़ कात रहे हैं यहाँ के लोग
तू इंकलाब कात ज़रा और बात कर

 

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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