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अनुभूति में कुंवर बेचैन की रचनाएँ—

हाइकु में-
वर्षा हाइकु

गीतों में—
ओ बासंती पवन

दोहों में—
नौ दोहे

अंजुमन में—
अंगुलियाँ थाम के
कफ़न बाँधकर
करो हमको न शर्मिंदा
खुद को नज़र के सामने
दो दिलों के दरमियाँ
दोनो ही पक्ष
धुआँ
नीर की गठरी
प्यासे होंठों से
फिर युधिष्ठिर को पुकारा
बीती नहीं है रात
मत पूछिए

 

खुद को नज़र के सामने

खुद को नज़र के सामने ला कर ग़ज़ल कहो
इस दिल में कोई दर्द बिठा कर गज़ल कहो

अब तक तो तुमने मैक़दों पै ही ग़ज़ल कही
होंठों से अब यह जाम हटा कर गज़ल कहो

दिन में भी दूर-दूर तलक रोशनी नहीं
अब तुम ही अपने दिल को जला कर गज़ल कहो

पूरी ही ग़ज़ल दिल की इबादत है दोस्तों!
अश्कों में ज़रा तुम भी नहा कर गज़ल कहो

दिल में न अगर आए तुम्हारे कोई 'कुंअर'
तो तुम ही किसी के दिल में समा कर ग़ज़ल कहो

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।