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अनुभूति में अभिनव शुक्ला की रचनाएँ -
गीतों में-
अंतिम मधुशाला (हरिवंशराय बच्चन को श्रद्धांजलि)

अपने दिल के हर आँसू को
आवाज़ें

नहीं बयान कर सके
बांसुरी
वक्त तो उड़ गया
शान ए अवध
है बड़ी ऊँची इमारत

ज़िन्दगी है यही

हास्य-व्यंग्य में -
इंटरव्यू
काम कैसे आएगी
गांधी खो गया है
जेब में कुछ नहीं है
मुट्टम मंत्र
विडंबना

संकलन में
ज्योति पर्व -वो काम दिवाली कर जाए
                खुशियों से भरपूर दिवाली  
गाँव में अलाव - कैसी सर्दी
प्रेमगीत - भावों के धागों को
गुच्छे भर अमलतास
नया साल-अभिनव नववर्ष हो
ममतामयी-मेरा आदर्श

 

आवाज़ें

बिखरे पर्व सहमती रातें
तेज़ पटाखों की आवाज़ें।
धूल की आँधी बाढ़ का पानी
फूस का छप्पर सूखे का डर
मटमैले कपड़े ढलता बचपन
थोड़े रुपए गाय का गोबर
खामोश आँखें नींद अधूरी
ढोल तमाशों की आवाज़ें।

जाति धर्म ज्ञान साहूकारी
नक्सलवादी बड़े बिहारी
कर्ज़ ब्याज तन थोथी हलचल
उधड़े कपड़े फटते कम्बल
राजनीतियाँ घर घर में घर
फेरीवालों की आवाज़ें।

बहुत अमीरी बहुत गरीबी
काला सोना गड़ा खज़ाना
गंगा मइया पंच सीकरी
छोड़े दफ्तर रोज़ बहाना
बाँस की खटिया लटके सिर धड़
तीर गडासों की आवाज़ें।

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