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अनुभूति में किशोर दिवसे की रचनाएँ

छंदमुक्त में—
और मैं लिखता हूँ कविता
किया है कभी अहसास
नल
मन और मस्तिष्क
स्वयंभू-युग पुरुष
 

 

मन और मस्तिष्क

कौन है सच्चा प्रजातंत्र वादी?
यकीनन ईश्वर ही है
मानव शरीर में संतुलन करना
मन और मस्तिष्क का!
यही है प्रजातान्त्रिक व्यवस्था
और इसके सिवा कुछ भी नहीं

अलौकिक एवं अबूझ पहेली
मस्तिष्क में समाहित है
विचारों की आकाशगंगा

सतत परिवर्तन शील भूमिका
निभाते हैं पति और पत्नी
अटूट विवाह बंधन है यह
मन और मस्तिष्क के भीतर
सच! मानव के लिए वरदान!

२३ मार्च २०१५

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