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अनुभूति में प्रत्यक्षा की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
इच्छा
एक ख़ामोश चुप लड़की
कोई शब्द नहीं
छुअन
तांडव
दो छोटी कविताएँ
प्रतिध्वनि
पीले झरते पत्तों पर
मल्लिकार्जुन मंसूर
माँ
मेरी छत
मोनालिसा

मौन की भाषा
याद
रात पहाड़ पर
लाल बिंदी
सुबह पहाड़ पर

संकलन में-
दिये जलाओ- लाल सूरज हँसता है
प्रणय गीत

दीपावली
मौसम- मौसम
गुलमोहर- गुलमोहर: तीन दृश्य

सुबह, पहाड़ पर

मेरी बंद मुठि्ठयों में कैद था एक पूरा दिन
सूर्य की पहली नज़र से
चाँद की पहली नज़र तक

पहाड़ की वादियाँ खुशबू से भारी होती हैं
ऐसा सुना था

खोजा
तो पाया
हथेलियों पर फूलों की खुशबू,
आँखों में कैद पाया
पिघलता सोना
बर्फ ढकीं चोटियों पर,
और
चाय की भाप उड़ाती चुस्कियों का स्वाद
थोड़ा कसा, कुछ गर्म

मेरी मुठ्ठी खुल गई थी
दिन बिखर गया था
सुख के हजार कणों में
वाकई पहाड़ की वादियाँ खुशबू से भारी होती हैं

 

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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