अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में वर्तिका नन्दा की रचनाएँ

नई रचनाओं में-
उत्सव
औरत ???
कल और आज के बीच
हसरतें

छंदमुक्त में-
आज
एक अदद इंतज़ार
एक था चंचल

एक ख्वाब की कब्रगाह
कौन हूँ मैं
झोंका जो आया अतीत की खिड़की से
नव वर्ष में
भूलना
मंगलसूत्र
वर्ष दो हजार दस
वो बत्ती वो रातें
संवाद
सच
हादसे– (मुंबई और मंगलौर के बीच मन)

  कौन हूँ मैं

इस बार नहीं डालने आम के अचार
खरीदनी बोतलें
डालनी धूप में
याद रखना एक-एक सामान

इस बार सर्दी के कपड़े
नहीं धोने हैं खुद
शिकाकाई में डाल कर
न ही करनी है चिंता
नीम के पत्ते ट्रंक के कोने में सरके या नहीं

इस बार नींबू का शरबत भी नहीं बनाना घर पर
कि खुश हों ननदें-देवरानियाँ
और मांगें कुछ बोतलें अपने लाडले बेटों के लिए

नहीं खरीदनी इस बार गार्डन की सेल से
कई साड़ियाँ
जो आएं काम साल भर दूसरों को देने में

इस साल कुछ अलग करना है
नया करना है
इस बार जन्म लेना है –पहली बार सलीके से
इस बार जमा करना है सामान
सिर्फ अपनी खुशी का
थोड़ी मुस्कान, थोड़ा सुकून, थोड़ी नजरअंदाजी

लेकिन यह प्रण तो पिछले साल भी किया था न।

७ जून २०१०

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter