अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में मीना चोपड़ा की कविताएँ-

नई रचनाओं में-
अमावस को
इश्क
एक अंतिम रचना
कुछ निशान वक्त के
ख़यालों में
मुट्ठी भर
सार्थकता

कविताओं में-
अवशेष
ओस की एक बूँद
गीत गाती
विस्मृत
स्तब्ध
सनन-सनन स्मृतियाँ

  अमावस को

अमावस को-
तारों से गिरती धूल में
चाँदनी रात का बुरादा शामिल कर
एक चमकीला अबीर
बना डाला मैने
उजला कर दिया इसको मलकर
रात का चौड़ा माथा।

सपनों के बीच की यह चमचमाहट
सुबह की धुन में
किसी चरवाहे की बाँसुरी की गुनगुनाहट बन
गूँजती है कहीं दूर पहाड़ी पर।

ऐसा लगता है जैसे किसीने
भोर के नशीले होठों पर
रात की आँखों से झरते झरनो मे धुला चाँद
लाकर रख दिया हो
वर्क से ढकी बर्फ़ी का डला हो।
और-
चाँदनी कुछ बेबस-सी
उस धुले चाँद को आगोश मे अपने भरकर
एक नई धुन और एक नई बाँसुरी को ढूँढ़ती
उसी पहाड़ी के पीछे छुपी
दोपहर के सुरों की आहट में
आती अमावस की बाट जोहती हुई
खो चुकी हो।

२५ जनवरी २०१०

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter