अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में मीना चोपड़ा की कविताएँ-

नई रचनाओं में-
अमावस को
इश्क
एक अंतिम रचना
कुछ निशान वक्त के
ख़यालों में
मुट्ठी भर
सार्थकता

कविताओं में-
अवशेष
ओस की एक बूँद
गीत गाती
विस्मृत
स्तब्ध
सनन-सनन स्मृतियाँ

 

सनन-सनन स्मृतियाँ

मदमस्त सुबह
लहरों में घुलती
मचलती ठंडी हवा
सनन-सनन स्मृतियाँ।
हीरे मोती जड़े
सुनहरे पंख पहन
ऊँची उड़ानें भरती
झिलमिल स्मृतियाँ।
सुबह की ठंडक में डोलता
स्वप्न लोक का झूला
स्मृतियों को पींगों में पनाह देता
जैसे कोई सुबह का भूला।
अतीत में भीगे वक़्त के
बदलते चोलों में पलती
आज रूबरू खड़ी हैं
सदृश्य आँखों में भरी हैं,
गुपचुप अनजान आवाज़ों में
जगी हुई ये अनमोल स्मृतियाँ।
अँधेरों में इन्हें
मैं डुबो नहीं सकती
कालिख से रंगों की इन्हें
भिगो नहीं सकती

मूँद कर आँखें
ओढ़कर कफ़न काले
मैं सो नहीं सकती।
मुआफ़ करना अंतरंग मेरे
अपनी स्याही की उजली सुबह
के मोती
मौत को सूँघती
कच्ची नींद के धागों में
मैं पिरो नहीं सकती।
दफ़न हो नहीं सकती।

२५ अगस्त २००८   

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter