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अनुभूति में उषा राजे सक्सेना की रचनाएँ-

कविताओं में
अस्तित्व की पहचान
इंद्रधनुष
तितली उड़ी
पदचिह्न
पुनर्जनम
लंदन का वसंत
सर्मपण
यात्रा का आरंभ

अंजुमन में
जब भी कोई कहानी लिखना
ज़िन्दगी को स्वार्थ का
प्यार में भी कहीं
परिंदा याद का
फ़िज़ाँ का रंग
रात भर काला धुआँ

संकलन में-
ज्योति पर्व-दीपावली के आलोक मे
आशा के दीप
आलोक पर्व

  रात भर काला धुआँ

रात भर काला धुआँ उठता रहा
दिल किसी खलिहान-सा जलता रहा

एक बिजली कौंध कर इतना हँसी
एक बादल देर रात तक रोता रहा

नाव की तक़दीर में था डूबना
एक माँझी देर तक सोता रहा

जानता था जो समय का फलसफा
वह समय के साथ में चलता रहा

यह 'उषा' किसकी दुआ का था असर
फूल पतझर में भी जो खिलता रहा

 

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