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अनुभूति में डॉ. जयजयराम आनंद की रचनाएँ-

नए दोहों में-
सन्नाटे में गाँव

दोहों में-
ताल ताल तट पर जमे
प्रदूषण और वैश्विक ताप

गीतों में-
अम्मा बापू का ऋण
आम नीम की छाँव
आँखों में तिरता है गाँव
केवल कोरे कागज़ रंगना
बहुत दिनों से
भूल गए हम गाँव
मेरे गीत
शहर में अम्मा

सुख दुख इस जीवन में
 

 

शहर में अम्मा

बीच शहर में रह कर अम्मा
गुमसुम रहती है

खड़ी चीन जैसी दीवारें
नील गगन छूती मीनारें
दिखें न सूरज चाँद सितारे
घर आँगन सब बंद किवारे
बिछुरी गाँव डगर से अम्माँ
पल-पल घुलती है

नंगा नाच देख टीवी में
नोंक-झोंक शौहर-बीवी में
नाती-पोते मुँह लटकाए
सन्नाटा हरदम सन्नाए
देख-देख सब घर में अम्मा
गुप-चुप रहती है

सारी दुनिया लगती बदली
चेहरा सबका दिखता नकली
धरम-करम सब रखे ताक में
सब के सब पैसा फ़िराक में
सह ना पाती ये सब अम्मा
सच-सच कहती है


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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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