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अनुभूति में सरिता शर्मा की रचनाएँ-

गीतों में-
कुछ पलों के लिये
ओस गिरती है उदासी की
तन की सीपी
बेटी
मैं पिघलती बर्फ की चट्टान
रात का आकाश


सवैये में-
मीरा


मुक्तक में-
बीस मुक्तक

दोहों में-
दर्द के दोहे
प्रेम के दोहे
भक्ति के दोहे
वैराग्य के दोहे

संकलन में-
होली है- आए ऋतुराज

शुभ दीपावली- दीप
शुभ दीपावली- माटी के दीपक

 

ओस गिरती है उदासी की

ओस गिरती है उदासी की
पत्तियों सा भीगता है मन

उँगलियों पर गिने जाते हैं
ये अकेले अनमने से दिन
साँस भी कब तक लिये डोले
हरसिंगारी खुशबुओं का ऋण

खुद ब खुद थम सा गया है शोर
दूर तक हैं रास्ते निर्जन

मिल गया सब कुछ मगर फिर भी
अजनबी सी चाह बाकी है
मंजिलों को छू लिया हमने
और अब भी राह बाकी है

बाहरी दुनिया भरी पूरी
भीतरी दुनिया बड़ी निर्धन

१ जून २००५

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