अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में सुधांशु उपाध्याय की रचनाएँ— 

ई रचनाओं में-
आधी रात
जो है होनेवाला
फोटो के बाहर चिड़िया
सपना रखना

गीतों में-
आने वाले कल पर सोचो
औरत खुलती है
कथा कहें
कमीज़ के नीचे
काशी की गलिया
ख्वाबों के नए मेघ
खुसरो नहीं गुज़रती रैन
जीने के भी कई बहाने
दरी बिछाकर बैठे
नींद में जंगल
पोरस पड़ा घायल
बात से आगे

हुसैन के घोड़े

 

नींद में जंगल

तुम्हारी आँख में अक्सर
लबालब ताल मिलते हैं
बहुत पहुँचे फ़क़ीरों से
तुम्हारे ख़याल मिलते हैं।

पहनकर धूप का चश्मा
तुम्हें नदियाँ बुलाती हैं
बहुत बेचैन दिन बीते
बुझी शामें बताती हैं
कहीं पानी, कहीं मछली
कहीं पर जाल मिलते हैं।

ये बादल टूट कर बरसें
तो कोई बात बनती है
हमें दिन तोड़ देते हैं
तो कोई रात बनती है
कहीं पर हाथ हिलते हैं
कहीं रूमाल मिलते हैं।

भटक कर लौट आए हैं
उसी अंधे कुएँ में हम
हुई निर्वस्त्र पांचाली
पराजित हैं जुए में हम
हमारी नींद में जंगल
कभी बस्तर
कभी संथाल मिलते हैं।

९ जून २००७

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter