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नई रचनाएँ- कम से कम कौन है ये जैनी तो क्या यहीं? नया आदमी फिर तो बौड़म जी बस में ससुर जी उवाच सिक्के की औक़ात
होली में- होरी सर र र
कविताओं में- बहुत पहले से भी बहुत पहले
हास्य व्यंग्य में- गति का कसूर ग़रीबदास का शून्य जंगल गाथा तमाशा समंदर की उम्र हँसना रोना हम तो करेंगे और एक पत्र - फ़ोटो सहित
स्तंभ- समस्यापूर्ति
संकलन में- नया साल-सुविचार
फिर तो
आख़िर कब तक इश्क इकतरफ़ा करते रहोगे, उसने तुम्हारे दिल को चोट पहुँचाई तो क्या करोगे?
-ऐसा हुआ तो लात मारूँगा उसके दिल को।
-फिर तो पैर में भी चोट आएगी तुमको।
01 फरवरी 2007
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