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कविताओं मेँ-
आग का लगना
कविता
पिच का कमाल
समय

 

 

चार कविताएँ

आग का लगना

शार्टसर्किट से
आग का लगना
इस बात का द्योतक है
कि उसके आस-पास
अग्निरोधक/अग्नि शमन
जैसी कोई भी वस्तु पास नहीं थी
अन्यथा
आग को रोका जा सकता था
आग का लगना जारी है
इसमें
देह भी सम्मिलित है
पेट के साथ
समुद्र भी!

1 अप्रैल 2007

समय

समय का फेर कहो
या उसकी गति
दुर्गति का
चित्रण साफ़-साफ़ है
उसके यहाँ
जुल्मी को सज़ा मिलती है
उसके पास
एक-एक क्षण का हिसाब है!

1 अप्रैल 2007

कविता

कविता का
गीत में, गीतिका में -
छंद में ढल जाना
कविता की सार्थकता को जताता है
वहीं कविता का
छल, छंद करना
पाश्चात्य में ढल जाना
उसे गर्त में गिराता है।

चरित्र हार जाता है!

पिच का कमाल

हाय! सिमरन
तुम्हारी बेवफ़ाई
हमारा दिल दुखाती हैं
आजकल
तेरी पिच
उछाल बहुत मारती है।
'बाल'
इतना स्विंग होती है
कि बैट्समैन
रन नहीं बना पाता है
बेचारा!
पिच पे आते ही
हेड विकट हो जाता है।

1 अप्रैल 2007

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।