अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में अजंता शर्मा की रचनाएँ

नई कविताएँ-
आओ जन्मदिन मनाएँ

ढूँढती हू
मेरी दुनिया

कविताओं में-
तीन हाइकू
जाने कौन-सी सीता रोई
ज़िंदगी
दूरियाँ
अनुरोध
अस्तित्व
उत्प्रेरक
कौतूहल
जमाव
दो छोटी कविताएँ
पहली बारिश
प्रतीक्षा
प्रवाह
व्यर्थ विषय

 

पहली बारिश

मुरली की तान पे बौराई राधे की तरह
खिंची चली आई हूँ
बारिश तेरी आहट पे।
तेरे बूँदों की थपकियों पर थिरकता मन
जाने कितने जज़्बों को 'हरा' कर लाया है।
जैसे एक-एक बूँदें तेरी
ज़मीं को सहलाती हैं
एक-एक किस्से-कविताएँ
जो बंद थी भीतर
फूट जाती हैं।
तेरे बरसते ही
जी करता हैं मैं भी बरसूँ
भेद कुढ़न का वायुमंडल
बिजली-सी चमकूँ!
हवाओं में रच जाऊँ
धूल संग बह जाऊँ
धो डालूँ हर तपिश
गगन भेद गूँजूँ।
बारिश तेरी फुहार जब जब गुदगुदाती है
मैं जी उठती हूँ
मेरी आत्मा सिंच जाती है।

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।