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नहीं थी फिर तमन्ना
नहीं थी फिर तमन्ना कोई मकाँ जलता हुआ देखें
पुरानी याद को लेकर तुझे रोता हुआ देखें
हमारी चाहतों के मिट गए नामो-निशां सारे
तुम्हारे ज़ुल्म हद से पार फिर होता हुआ देखें
वो हरकत से कभी तो बाज आ जाए गनीमत है
उसे यूँ देखना मानो खुदा जैसा हुआ देखें
उसी की है ये रहमत जो दिया जलता मिला हमको
कभी आँधी कभी तूफ़ान से लड़ता हुआ देखें
नहीं हम जानते वो कौन सी
चक्की पिसा खाते
उसे अपने बगीचे रोज ही मोटा हुआ देखें
यही तसवीर जीने का सहारा
है फ़क़त अब तो
इसी तस्वीर का शीशा कभी टूटा हुआ देखें
जमाने की हुकूमत है उसी
के पास इस कारण
जमाने को उसी से बारहा कुचला हुआ देखें
१ जुलाई २०२५ |