अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में अश्विनी कुमार विष्णु की रचनाएँ—
नयी रचनाओं में-
दुबारा वतन
नहीं गिरता
नहीं थी फिर तमन्ना
बात बिगड़ी जो बनाऊँ
शोलों से खेलना

छंदमुक्त में-
ऊँचाई
घर
जलस्तर
थकन
वन देवता

हाइकु में-
बारह हाइकु मौसम के नाम

गीतों में-
चंदा मामा रहो न अब यों
चलना पथ पाना है

तटबन्धों-का टूटना
मन की पहरेदारी में

मेघ से कह दो

अंजुमन में-
टूटे-फूटे घर में
फ़ुर्सत मिले तो
बिना मौसम
शहर में

संकलन में-
नयनन में नंदलाल- प्रभुकुंज बिहारी
नया साल- नया क्या साल में है
ममतामयी- जय अम्बिके
विजयपर्वी- आशाएँ फलने को विजयपर्व कहता चल
         पिंजरे का तोता
होली है- फागुन की पहली पगचाप

हरसिंगार- मन हरसिंगार

  शोलों से खेलना

शोलों से खेलना ही सिखाया गया मुझे
बे-वक्त इंतकाम पढ़ाया गया मुझे

आँधी से डर के भागता मौसम यहाँ वहाँ
आँधी से डर के ही तो छुपाया गया मुझे

बर्बाद हो गया था कभी कर के आरज़ू
भंवर से वक्त रहते छुड़ाया गया मुझे

रहती थी जो तरसती ये आँखे विसाल को
दिल का खुलासा उनका बताया गया मुझे

है मामला ये शौक का कुछ दिन ही के लिए
कुछ दिन ही कह के खूब सताया गया मुझे

मैं आसमान की जिदों में था अड़ा हुआ
तारे ज़मीं पे रोज दिखाया गया मुझे

गाफ़िल था नींद में सभी घोड़ों को बेचकर
घुड़दौड़ पास-आते जगाया गया मुझे

नफ़रत थी सामने मेरी मजबूरियाँ कहीं
इंसाफ़ का भरोसा दिलाया गया मुझे

१ जुलाई २०२५

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter