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आसमाँ में
उजाले तीरगी में
जी रहे हैं लोग
भले ही रोशनी कम हो

अंजुमन में—
अँधेरे इस क़दर हावी है
इसलिए कि
किसी का डर नहीं रहा
डर मुझे भी लगा
जिन्हें अच्छा नहीं लगता
ज़ुबां पर फूल होते है
तूफ़ानों की हिम्मत
थोड़ी मस्ती थोड़ा ईमान
नहीं होती
फूलों का परिवार
बढ़े चलिये
बड़े भाई के घर से
भले ही उम्र भर
मुझको पत्थर अगर
ये तो है कि
विचारों पर सियासी रंग
शिकायत ये कि
संसद में बिल
सभी तय कर रहे हैं

हमारे हमसफ़र भी
हमारी चेतना पर

 

उजाले तीरगी में

उजाले तीरगी में ढल गए हैं
दिये तो शाम से जल गए हैं

चराग़ों की हिफ़ाज़त कर रहा हूँ
भले ही हाथ मेरे जल गए हैं

हमें हर रास्ता पहचानता है
जहाँ भी हम गए पैदल गए हैं

जहाँ जाना नहीं था तो नहीं था
जहाँ जाना था सर के बल गए हैं

कोई हहलचल नहीं है आसमाँ पर
न जाने किस तरफ़ बादल गए हैं

बड़ी उम्मीद थी जिन फ़ैसलों से
वो सारे फ़ैसले फिर टल गए हैं

३ नवंबर २०१४

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