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अनुभूति में ब्रजकिशोर वर्मा 'शैदी' की रचनाएँ-

अंजुमन में-
चुप था
जिस पर पैनी धार नहीं है
तुमने गर अपनाया होता
मुझको यह अहसास
सोच रहे सब

 

मुझको यह अहसास

मुझको यह अहसास रहा है
वह मेरे ही पास रहा है

मन प्यासा है उसकी खातिर
बनकर मेरी प्यास रहा है

सब टूटे, वह साबुत अब तक
रिश्ता कोई ख़ास रहा है

उसके अंदर पढ़ लो मुझको
वह मेरा इतिहास रहा है

उसके बिन भी जी लेता हूँ
मुझको यह अभ्यास रहा है

कहने को गुलशन हूँ, लेकिन
दूर-दूर मधुमास रहा है!

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