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अनुभूति में ब्रजकिशोर वर्मा 'शैदी' की रचनाएँ-

अंजुमन में-
चुप था
जिस पर पैनी धार नहीं है
तुमने गर अपनाया होता
मुझको यह अहसास
सोच रहे सब

 

मुझको यह अहसास

मुझको यह अहसास रहा है
वह मेरे ही पास रहा है

मन प्यासा है उसकी खातिर
बनकर मेरी प्यास रहा है

सब टूटे, वह साबुत अब तक
रिश्ता कोई ख़ास रहा है

उसके अंदर पढ़ लो मुझको
वह मेरा इतिहास रहा है

उसके बिन भी जी लेता हूँ
मुझको यह अभ्यास रहा है

कहने को गुलशन हूँ, लेकिन
दूर-दूर मधुमास रहा है!

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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