अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अभिव्यक्ति में नरेश अग्रवाल की
रचनाएँ-

नई रचनाओं में-
खुशियाँ
चित्रकार
दुनिया के सारे कुएँ
मैं सोचता हूँ
हर आने वाली मुसीबत

छोटी कविताओं में-
तुम्हारा न रहना (तीन छोटी कविताएँ)

छंदमुक्त में-
इंतज़ार
कितने ज़माने से
खिलाड़ी
रेगिस्तान
विज्ञापन

 

`

हर आने वाली मुसीबत

उसकी गतिविधियाँ
असामान्य होती हैं
दूर से पहचानना
बहुत मुश्किल होता है
या तो वह कोई बाढ़ होती है
या तो कोई तूफान
या फिर अचानक आई गन्ध

वह अपने आप
अपना द्वार खोलती है और
बिना इजाजत प्रवेश कर जाती है

फिर भागते रहो
घंटों छुपते रहो इससे
जब तक वह दूर नहीं चली जाती
हमारे मन से

बचा रह जाता है
उसके दुबारा लौट आने का भय।

३० जून २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter