अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्तिकुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में अनिल प्रभा कुमार की रचनाएँ—

नई रचनाएँ—
माँ- तीन कविताएँ

छंदमुक्त में—
अच्छा हुआ
आभार

उम्मीद
जवाब
दूरी

धन्यवाद
धूप
पिरामिड की ममी
प्रेम कविताएँ

बंद आँखें
माँ दर मा

विमान
साथ
सूर्यास्त

 

प्रेम कविताएँ

प्रेम कविताओं से
पता नहीं क्यों
मुझे झुँझलाहट होती है
चिपचिपी बातें
लिजलिजे इरादे
इरादों में छिपे फन्दे
फन्दों में घुटते रिश्ते।
सबको तोड़कर
दो किसी को
खुला आकाश,
ठोस ज़मीन
गुनगुनी धूप
ठंडी बयार
तब मैं समझूँगी
कि यह होता है
प्यार।

१६ अप्रैल २०१२

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter