अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्रामगौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजें
पुराने अंकसंकलनहाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में अवतंस कुमार की रचनाएँ

नई रचनाओं में-
क़द्रदान
का से कहूँ
खुशियाँ

हादसा

छंदमुक्त में-
अहसास
आज मुझे तुम राह दिखा दो
दरमिया
पैबंद

विवेक
शाम और शहर
पत्ता और बुलबुला

मैं और मेरी तनहाई

 

हादसा

अँधेरी रात में दबे पाँव किसी ने
पलीते में आग लगा दी
टूटी खिड़कियाँ, सूने दरीचे
गुमनाम गलियाँ, पथरीली राहें
हर कोना, हर लम्हा
तबाही और मातम का माहौल
सीने में खलिश, होठों पे प्यास
आँखों में जलन, दिल में अंगार
जज्बातों का गुबार फूटा
आँसुओं का सैलाब उमड़ पडा
और दिलों के ज़ख्म फिर से हरे हो उठे

टूटी खिडकियों के टुकड़ों को समेटने की कोशिश की
तो हाथ लहू-लुहान हो गए
चारदीवारी नापने की कोशिश की
तो पैरों में छाले पड़ गए
पसीना पोंछा
तो खून की बूँदें टपक पडीं
बाजू में झाँका
तो लोग नए थे
अपना अक्स आईने में देखा
तो चेहरा बदल गया था

भौचक नींद खुली और जगा मैं
हादसों की बस्ती में एक और हादसा हुआ

३१ मई २०१०

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है