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शशि पाधा

पर्वतों की गोद में बसे जम्मू नगर में जन्मी शशि पाधा बाल्यकाल से ही साहित्य सृजन में संलग्न रहीं।
उन्होंने जम्मू - कश्मीर विश्वविद्यालय से एम.ए हिन्दी ,एम.ए संस्कॄत तथा बी . एड की शिक्षा ग्रहण की।
१९६७ में वे सितार वादन प्रतियोगिता में राज्य के प्रथम पुरस्कार से सम्मानित हुईं तथा १९६८ में जम्मू विश्वविद्यालय से "ऑल राउंड बेस्ट वीमेन ग्रेजुयेट " के पुरस्कार से। आकाशवाणी जम्मू के नाटक, परिचर्चा, वाद विवाद , काव्य पाठ आदि विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हुए शशि पाधा ने लगभग १६ वर्ष तक भारत में हिन्दी तथा संस्कृत भाषा में अध्यापन का कार्य किया। सैनिक की पत्नी होने के नाते सैनिकों के शौर्य एवं बलिदान से अभिभूत हो अनेक रचनाएँ लिखीं। इनके लेख, कहानियाँ एवं काव्य रचनाएँ " पंजाब केसरी " एवं देश विदेश की विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में छपती रहीं। साथ ही अनूप जलोटा तथा अन्य गायकों ने उन्हें स्वर बद्ध करके गाया भी।

२००२ में वे यू.एस.ए. आईं और नार्थ केरोलिना के चैपल हिल विश्वविद्यालय में हिन्दी भाषा का अध्यापन किया। इनकी रचनाएँ यू.एस. से प्रकाशित "प्रवासिनी के बोल एवं कैनेडा से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका हिन्दी चेतना में प्रकाशित हो चुकी हैं। वे भारत तथा यू.एस.ए. की विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी हैं। अपने परिवार के साथ कनेक्टीकट में निवास करने वाली शशि के दो कविता संग्रह पहली किरण तथा मानस मंथन प्रकाशित हुए हैं ।

ई मेल shashipadha@gmail.com

 

अनुभूति में शशि पाधा की रचनाएँ

गीतों में-
आश्वासन
क्यों पीड़ा हो गई जीवन धन
बस तेरे लिए


 

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