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अनुभूति में धनंजय सिंह की रचनाएँ-

गीतों में-
दिन क्यों बीत गए

ध्वन्यालोकी प्रियंवदाएँ
पानी थरथराता है
बेच दिये हैं मीठे सपने
भाव विहग
मधुमय आलाप
मौन की चादर

 

 

 

भाव विहग

भाव-विहग उड़ इधर-उधर
दुख दाने चुग आए
मन पर घनी वनस्पतियों के
जंगल उग आए

चीते-जैसे घात लगाए
कई कुटिलताएँ
मुग्ध हिरन की आँखों का
संवेदन समझाएँ

किस-किस बियाबान के कर्ज़े
जीवन भुगताए

हरे ताल की छाती पर
आ बैठी जलकुम्भी
और किनारे पर कँटिया ले
बैठे हो तुम भी

एक-एक पीड़ा के बाँटे
कितने युग आए

२३ अप्रैल २०१२

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