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अनुभूति में धनंजय सिंह की रचनाएँ-

गीतों में-
दिन क्यों बीत गए

ध्वन्यालोकी प्रियंवदाएँ
पानी थरथराता है
बेच दिये हैं मीठे सपने
भाव विहग
मधुमय आलाप
मौन की चादर

 

 

 

 

पानी थरथराता है

झाँकते हैं
फिर नदी में पेड़
पानी थरथराता है

यह
नुकीले पत्थरों का तल
काटता है धार को प्रतिपल

और
तट की बाँबियों को छेड़
फिर कोई संपेरा गुनगुनाता है

हर नदी का
शौक़ है घड़ियाल
कह न पातीं मछलियाँ वाचाल

पूछती है
एक काली भेड़
यह सूरज यहाँ क्यों रोज़ आता है

२३ अप्रैल २०१२

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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