अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में तसलीम अहमद की रचनाएँ-

नई रचनाएँ-
अंतर
एस्केलेटर
फ़ोन
शौहर बीवी

मुक्त छंद में-
परिचय
ज़िंदगी
मेरा गाँव
शादी
जीवन साथी

 

फ़ोन

चिट्ठी थी जो एक सहारा,
छीन ली थी फ़ोन ने।
घर से निकलकर माँ से दूरी
और बढ़ा दी फ़ोन ने।

बातें सब होती, लेकिन
लगता कुछ रह गया,
अनकही-सी एक कसक
दिल में बढ़ा दी फ़ोन ने।

माँ की बीमारी की सुन
तड़प उठा जब मेरा दिल,
अब्बू के कुछ कहने से पहले
बात काट दी फ़ोन ने।

अबकी बार आऊँगा माँ
सच, ये मेरा वादा रहा,
जब-जब चलने को हुआ,
टिकट रद करा दी फ़ोन ने।

उनके लिए जी रहा था,
हर तरक्की उनके लिए,
माँ के शिकवे पर हमेशा
बात कह दी फ़ोन ने।

एक दिन ऐसा भी आया
मैं ठगा-सा रह गया,
माँ की मौत की खबर
चुपके से सुना दी फ़ोन ने।

६ अक्तूबर २००८

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है