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अमर ज्योति नदीम

शिक्षा: एम.ए. (अँग्रेज़ी), एम. ए. (हिंदी), पीएच.डी. (अँग्रेज़ी) आगरा विश्वविद्यालय)

संप्रतिः विभिन्न स्तरों पर अध्यापन के उपरांत ग्रामीण बैंक में अधिकारी।

रचनाएँ: अधिकतर ग़ज़लें, कुछ गीत, कुछ अतुकांत कविताएँ, कुछ लेख, फ़िट्ज़्जेरल्ड की 'रुबाइयात उमर ख़ैय्याम' की कई रुबाइयो का हिंदी अनुवाद, एक खंडकाव्य।

कुछ ग़ज़लें व लेख इधर-उधर प्रकाशित।

ईमेल- amarjyoti55@gmail.com

 

अनुभूति में अमर ज्योति नदीम की रचनाएँ
नई रचनाएँ-
अपनी धरती
दुखों से दोस्ताना
बंजरों में बहार
यों तो संबन्ध
हों ऋचाएँ वेद की

अंजुमन में-
उम्र कुछ इस तरह
घर में बैठे रहे
तेरी ज़िद
धूल को चंदन
पेट भरते हैं
बागों में

बादल तितली धूप
मेरे घर के बाहर अक्सर
मौत ज़िंदगी पर भारी है
सिमटने की हकीकत

 

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