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विजयेन्द्र विज

जन्म : २८ अगस्त १९७ में, फतेहपुर, उत्तरप्रदेश में
शिक्षा : बी.कॉम. तथा मल्टीमीडिया व एनीमेशन में डिप्लोमा।
विजयेन्द्र नयी पीढ़ी के उभरते हुए ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने बहुत थोड़े से ही समय में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज की है। वे पेन्सिल, तैल, पेस्टल और मिश्र माध्यम काम करते रहे हैं लेकिन पिछले कुछ सालों से उन्होंने कंप्यूटर और डिजिटल आर्ट के क्षेत्र में भारतीय कला को नया रूप और दिशा देने का अदभुत काम किया हैं।

साहित्य में विजयेन्द्र की गहरी दिलचस्पी रही है पर कवि के रूप में अभी उनकी पहचान बननी बाकी है। उनकी कविताओं में बसी संवेदनशीलता और शैली का नयापन नयी पीढ़ी की हिन्दी कविता के बेहतर भविष्य के प्रति आश्वस्त करते हैं। उनका चिट्ठा जुगलबंदी यहाँ पढ़ा जा सकता है।

ईमेल :
vijendra.vij@gmail.com   

(अभिव्यक्ति में विस्तार से) 

 

अनुभूति में विजयेन्द्र विज की रचनाएँ-

नई कविताओं में-
आड़ी तिरछी रेखाएँ
ऋतुपर्णा तुम आज भी नहीं आयीं
जुगनुओं अब तुम सितारे हो गए हो
बेचैनी
वृंदावन की विधवाएँ
शब्द तुम


कविताओं में-
अक्सर, मौसमों की छत तले
अगर किसी रोज
अरसे के बाद
आँखें
एक और वैलेन्टाइन्स डे
कभी वापस लौटेगी वो
खोजो कि वो मिल जाए
दस्तावेजों की दुनिया
मुकर गए वो लोग
रंग ज़िंदगी की तरह
लाल बत्तियों में साँस लेता वक्
वह आवाज अक्सर मेरा पीछा करती है

सोचता हूँ

 

 

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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