अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में विपिन शून्य की रचनाएँ—

नई रचनाएँ
दर्द निवारक हो जाएँ
सिमटते जज़्बात
लालटेन
सफ़ेद होली
प्यार का अर्थ

कविताओं में
उम्र का पड़ाव
करवट
बाज़ार
मैं ईराक हूँ
वो जूता

 

करवट

न जाने कितनी सोच
करवट का रूप लिए
कभी इधर कभी उधर
छलाँगे मार
पलटती फिरती है।
कभी बेरोजग़ारी के
बिस्तर में
किसी नौकरी को
आवाज़ देती मिलती है करवट।
कभी किताबों के बीच
दम घोटती हुई
बच्चे की फीस को
सोचती है करवट।
कभी बीमार माँ का
इलाज खोजती है करवट,
तो कभी रंग
फीके करती है
कुँवारी बहन के
लाल जोड़े की ख़ातिर,
और कभी दांपत्य जीवन
करवट बदलता है
आधी रात के कोहरे में,
तो कभी उम्र
बदलती है करवट
सफ़ेद बालों की निशानी बनकर।
कुछ ऐसी ही करवटें
हर पल, हर उस घर में
बदली जाती हैं
जहाँ बसता है
एक आम इंसान।
इन्हीं करवटों में
आम जीवन को
काटती हुई ज़िंदगी
अधूरी करवटों के साथ
न जाने कब
अंतिम करवट
ले लिया करती है।

9 जनवरी 2007

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter