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धुँधली रेखाओं के बीच से
उभरता आता दृश्य -
तरल है,
उमड़ता हुआ, बहता हुआ, निर्मल।
उस में रंग मत भरो।

क्यों चाहते हो परिभाषाएँ
क्यों ढूंढ़ते हो अर्थ।
अपने परिवेश में
स्वच्छंद, निर्द्वंद्व
उसे उड़ने दो।

समय बड़ा जाल है
बुनता चला जाएगा, गुत्थियाँ।
छोड़ दो निर्बंध उसे
किसी आज कल में
मत लपेटो।

२१ जनवरी २००८

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