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अनुभूति में रजनी भार्गव की रचनाएँ —
अनसुनी आवाज़ गरमी की एक दोपहर घर धूप प्रतीक्षा बसंत मेरी कहानी मौन प्रतीक लहरों का गाँव सीमित दायरे
लहरों का गाँव
तुम्हारा जब ख़याल आता है, ख़यालों का ताँता लग जाता है, किनारे पर लहरों का गाँव बस जाता है, लहरों का जब शोर आता है, तुम्हारी मुस्कान सीपीयों में भर लाता है, अनगिनत मोड़ पर तुम्हारा अक्स छोड़ जाता है।
24 सितंबर 2007
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