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अनुभूति में रजनी भार्गव की रचनाएँ —
अनसुनी आवाज़ गरमी की एक दोपहर घर धूप प्रतीक्षा बसंत मेरी कहानी मौन प्रतीक लहरों का गाँव सीमित दायरे
मौन प्रतीक
साँझ के रंगों में उदय होता वो पहला तारा, मेरी आँखों में तैर रहा था, रात भर सपनों में गूँथा, सुबह आँख के कोरों से बह गया था, सिरहाने सिर्फ़ उसका अहसास था, भूलते हुए स्वप्न का वह मौन प्रतीक था।
24 सितंबर 2007
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