अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में प्रो. 'आदेश' हरिशंकर
की रचनाएँ-

कविताएँ-
अमल भक्ति दो माता
आया मधुमास
एक दीप
चन्दन वन
जीवन
जीवन और भावना

धरती कहे पुकार के
नया उजाला देगी हिन्दी
प्रश्न
मृत्यु
रश्मि जगी
लौट चलो घर
वन में दीपावली
विहान हुआ
संपूर्ण
सरस्वती वंदना

संकलन में-
ज्योतिपर्व  - दीपक जलता
          - मधुर दीपक
          - मत हो हताश
मेरा भारत  - मातृभूमि जय हे
जग का मेला -चंदामामा रे
नया साल   -शुभ हो नूतन वर्

 

संपूर्ण

मैं जानता हूँ कि तुम
मुझे प्यार नहीं दे सकोगे,
तो घृणा ही दे दो।
मैं जानता हूँ कि तुम
मुझे सुख नहीं दे सकोगे,
तो पीड़ा ही दे दो।
किन्तु, जो कुछ भी दो,
दो संपूर्ण।
मैं नहीं चाहता कि तुम
उसका एक अंश भी
अपने पास रखो।
सारी घृणा,
सारी पीड़ा,
मुझे दे दो।
ताकि संसार के
हर प्राणी को देने के लिए
तुम्हारे पास
प्यार के अतिरिक्त और कुछ न रहे।।

(कविता का अर्द्ध कुंभ: जीवन की अर्द्ध शती काव्य संग्रह से)

 

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।

website metrics