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अनुभूति में प्रो. 'आदेश' हरिशंकर
की रचनाएँ-

कविताएँ-
अमल भक्ति दो माता
आया मधुमास
एक दीप
चन्दन वन
जीवन
जीवन और भावना

धरती कहे पुकार के
नया उजाला देगी हिन्दी
प्रश्न
मृत्यु
रश्मि जगी
लौट चलो घर
वन में दीपावली
विहान हुआ
संपूर्ण
सरस्वती वंदना

संकलन में-
ज्योतिपर्व  - दीपक जलता
          - मधुर दीपक
          - मत हो हताश
मेरा भारत  - मातृभूमि जय हे
जग का मेला -चंदामामा रे
नया साल   -शुभ हो नूतन वर्

 

सरस्वती वन्दना

मुझको नवल उत्थान दो।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।

मां शारदे! हंसासिनी!
वागीश! वीणावादिनी!
मुझको अगम स्वर-ज्ञान दो।।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।

निष्काम हो मन कामना,
मेरी सफल हो साधना,
नव गति, नई लय तान दो।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।

हो सत्य जीवन-सारथी,
तेरी करूँ नित आरती,
समृद्धि, सुख, सम्मान दो।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।

मन, बुद्धि, हृदय पवित्र हो,
मेरा महान चरित्र हो,
विद्या, विनय, बल दान दो।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।

सौ वर्ष तक जीते रहें,
सुख-अमिय हम पीते रहें,
निज चरण में सुस्थान दो।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।

यह विश्व ही परिवार हो,
सबके लिए सम प्यार हो,
'आदेश' लक्ष्य महान दो।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।

(देवलोक काव्य संग्रह से)

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।

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