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कविताओं में
ओ मेरी प्यारी वादी
याद आते हैं वे खेत और खलिहान
यों मिली खुशी
शाहजहाँ को फिर न लेना पड़े जन्म

हाइकु में-
गुलमोहर हाइकु

संकलन में-
अमलतास- हँसे अमलतास (हाइकु)
         अमलतास ने ली अँगड़ाई है (गीत)

शुभ दीपावली- फिर दीवाली आई है
होली है- वसंत और होली

 

यों मिली खुशी...

फूलों के रंग से, सौरभ और मकरंद से
पवन की तरंग से, समीर के स्पंद से
यों मिली खुशी,
वसुधा के इस विहंग से।

भँवरे की गुंजन से, तितली की उमंग से
पाखी के रंजन से, दिलों के मृदंग से
यों मिली खुशी,
वसुधा के इस संगम से।

मौसम के बसंत से, महुए की सुगंध से
पीत के अनंत से, बयार की गंध से
यों मिली खुशी,
वसुधा के इस आनंद से।

प्रेयसी की प्रीत से, मन के मीत से
वादी के संगीत से, कोयल के गीत से
यों मिली खुशी,
वसुधा की इस रीत से।

9 सितंबर 2007

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