अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में लक्ष्मी शंकर वाजपेयी की रचनाएँ

नयी रचनाएँ-
आदमी के साथ
चाँद पूनम का
दर्द से दामन
भूली यादों
पगडंडियाँ बनाएँगे

हाइकु में-
बारह हाइकु

अंजुमन में-
अपने ही हाथों में
एक कमरे में
खूब नारे उछाले गए
टूटते लोगों को
वो दर्द वो बदहाली
पूछा था रात

 

एक कमरे में

पूरा परिवार, एक कमरे में
कितने संसार, एक कमरे में।

हो नहीं पाया बड़े सपनों का
छोटा आकार, एक कमरे में।

ज़िक्र दादा की उस हवेली का
सैंकड़ों बार, एक कमरे में।

शोरगुल नींद, पढ़ाई टी.वी.
रोज़ तकरार, एक कमरे में।

एक घर, हर किसी की आँखों में
सबका विस्तार, एक कमरे में।

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।