अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में डॉ. कृष्ण कन्हैया की रचनाएँ-

नई रचनाओं में-
कटिबद्धता
कालजयी
दूरगामी सच
झाँवा पत्थर
प्रमाणिकता

अंजुमन में-
कहने सुनने की आदत
क्षण-क्षण बदलाव
जिन्दगी मुश्किल मेरी थी

यादें

छंदमुक्त में-
अतिक्रमण
आयाम
उम्दा
एहसान
किताब ज़िंदगी की
खाई
खुशी
चरित्र
छाया
जिन्दगी का गणित
जिन्दगी की दौड़
रेशमी कीड़ा
रात
ललक
वस्त्र
विचार
विवेक
वैमनस्य

सामीप्य
सौदा

 

ज़िंदगी का गणित

ज़िंदगी के गणित में
नियमित लगे रहना
कितना परिणामदायक है-
यह कहना, निस्संदेह मुश्किल है।
इन 'पहाड़ों' का दैनिक जीवन में इस्तेमाल
तभी वाजिब है जब-
दिल को जोड़ सके
दुश्मनी घटा सके
सुख को कई गुणा कर
दुःख विभाजित कर सके

यह खुले आईने का सच है
जिसे देखनेवाला तभी समझ सकता है
जब उसके सीने में आर्यभट्ट की निगाहें हों-
जिसमें लंबित ज़िंदगी के अंक के बाद
ज़्यादा शून्य बिठाकर
मान बढाने का जज़्बा हो
या
बिखराव के दशमलव वाले अंक को
हाशिए पर डालने का हुनर

ताकि
इल्म की गुणवत्ता बढ़े
और साथ-साथ
ज़िंदगी जीने के
मायने-मतलब भी।

५ अप्रैल २०१०

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter