अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में मोहन राणा की रचनाएँ—
नई रचनाएँ—
अर्थ शब्दों में नहीं तुम्हारे भीतर है
कोई बात
डरौआ
पतझर में
पानी का चेहरा

क्षणिकाओं में—
पाँच क्षणिकाएँ

कविताओं में—
अपनी कही बात
अपने आप
अस्तव्यस्त में
आरी की कीमत
एक गरम दिन की स्मृति
किताब का दिन
कुआँ
कुछ कहना
कुछ भी
चार छोटी कविताएँ
चिड़िया
चिमनी
चींटी तथा अन्य छोटी कविताएँ
टेलीफोन
तीसरा युद्ध
धोबी
पतझर एक मौसम तुम्हारे लिए
फिलिप्स का रेडियो
फोटोग्राफ़ में
बड़ा काम
बोध
माया
मैं
राख
सड़क का रंग

संकलनों में—
गुच्छे भर अमलतास - ग्रीष्म
सनटैन लोशन
१५ मई
पिता की तस्वीर - डाक

  चार छोटी कविताएँ

अतिरिक्त
यह जनम किसका कि सुबह हुई
दोपहर और शाम हुई
उसने बताया तुम्हारी उम्र इतनी हुई,
कितनी
कितनी
समा गई एक ही शब्द मे
पूछते मैं दौड़ता रहा उसके पीछे
उठाए एक रिक्त स्थान को-`
पर उसे कहाँ रखूँ
इस प्रश्नपत्र में

स्मृति चिह्न
रह जाती उसकी याद यात्रा से लौट कर
छूटा जो पीछे कहीं दूर,
साथ न होते हुए भी जो साथ अब
जो नहीं दिखता
नहीं सुन पड़ता
छू नहीं सकता जिसे पर
यह होना उसका न होकर भी यहाँ

सुबह
बोलती चिड़िया बोलती
बंद कर सोचना
शुरू कर कुछ करना
सोने दे सपने को
जगा अपने मन को,
बोलती चिड़िया कुछ
और मैं सोचता उसको

ईंधन
वह जून का लंबा एक दिन था थका हुआ
सरकता हुआ
मेरी धमनियों में,
मैंने घड़ी को देखना बंद कर दिया
उसमें मेरे लिए समय नहीं
कोई सस्ता सा समय-`
एक पल में पूरे जीवन की स्मृति कौंध गई मन में,
बीते उस दिन अमलतास नीचे बिखरी छाया को
अगली कविता के लिए

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter