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कोई बात

धूपघड़ी में सूरज
उतरा
कि दिखा
धूपघड़ी में अँधेरा

धरती ना घूमती तो होता कैसे
दिन पूरा इस घड़ी का

आना ही था यहाँ
जानने
बेकार गिनना समय को
रोशनी और छायाओं में
बस गिनता हूँ अपने आप को

जब तक याद रहती है
कोई बात भूलने के लिए

६ जुलाई २००९

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