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बोध
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संकलनों में—
गुच्छे भर अमलतास - ग्रीष्म
सनटैन लोशन
१५ मई
पिता की तस्वीर - डाक

  फिलिप्स का रेडियो

उस पर विविध भारती और समाचार सुनते
घर पुराना हो गया
उसके साथ ही ऊँची नीची आवाजें कमजोर तरंगें
उसके नॉब भी खो गये पिछली सफेदी में
धूप में गरमाये सेल रात के अंधरे में एकाएक
चुप हो जाते हैं
समाचारों के बीच-
आइंडहोवन की खुली सड़कों में तेज हवा से बचते
शहर के बीच
खड़ी विशाल फिलिप्स कॉरपोरेशन की इमारत को देखता-
जेब्राक्रॉसिंग पे खड़ा मैं सोचता-
क्या यह फिलिप्स का रेडियो है!

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