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अनुभूति में शार्दूला की रचनाएँ

नई रचनाएँ-
मैं हूँ वो प्यास
खोटा सिक्का
तीन छोटी रचनाएँ-
   बोलो कहाँ उपजाई थी
   कब आओगे नगरी मेरी
   ये गीत तेरा

ये ज़मीं प्रिय वो नहीं

कविताओं में-
आ अब लौट चले

आराधना
चाहत के चिराग
चार छोटी कविताएँ
चिनगारी
तेरे पीछे माया
दोस्त
दोहे
बसंत आया
पारस
माँ
विदा की अगन
सूरज में गर्मी ना हो
हँसी 

 

शार्दूला के दोहे

थोड़ा मन में चैन जो, तुझ को रहा उधार
तेरी भेजी लकड़ियाँ, मुझको हैं पतवार।

आधी-आधी तोड़ कर, बाँटी रोटी रोज़
पानी में भीगा चूल्हा, जाने किसका दोष।

परचम ना फहराइए, खुद को समझ महान
औरों के भी एब पे, थोड़ी चादर तान।

कम ज़्यादा का ये गणित, विधि का लिखा विधान
तू मुझको दे पा रहा, अपनी किस्मत जान।

और अंत में दोस्तों, तिनका-तिनका जोड़
औरों का मरहम बनें, यही दर्द का तोड़।

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है