अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में शार्दूला की रचनाएँ

नई रचना
चार छोटी कविताएँ

कविताओं में
आराधना
चाहत के चिराग
तेरे पीछे माया
दोस्त
दोहे
बसंत आया
पारस
विदा की अगन
सूरज में गर्मी ना हो
हँसी 

  दोस्त

मुझसे मत पूछ कि ऐ दोस्त तुझ में क्या देखा
तेरी हर बात में अपना ही फ़लसफ़ा देखा।

मंज़िलों को चलें साथ हम मुमकिन नहीं मगर
जब से तू संग चला, फूलों का रस्ता देखा।

निखर गई मेरी रंगत, सँवर गईं जुल्फ़ें
ये तेरी आँख में देखा कि आईना देखा।

न गै़रों की नज़र लगे, न हम खुद हों बेवफ़ा
ये दुआ करी हमने, ये ही सपना देखा।

मुझसे मत पूछ कि ऐ दोस्त तुझ में क्या देखा।

24 अप्रैल 2005

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।

website metrics