अंजुमन उपहार । कविकाव्य चर्चा काव्य संगम किशोर कोना गौरव ग्राम
गौरवग्रंथ
दोहे रचनाएँ भेजें नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन
हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

 


अनुभूति में सुभाष काक की कविताएँ- 

नई कविताएँ-
एक सहेली
ग्रहण
चंद्रमा
जंगल में आग
नगर
नयनों का कोना
संवाद
सीमा पार


कविताओं में-
अंगारों का रास्ता
अनुराग और द्वेष
अश्वताल
इतिहास पुराण
एक और युद्ध
पत्ते और भाव
प्रेम का संकेत
पशु विदाई
रंग अंधेरे में
श्वेत फूल

संकलन में—
वर्षा मंगल–डरा पक्षी

 

अंगारों का रास्ता

आग से आग के वीथि पर
अंगारे बिखरे हैं।
समय थोड़ा है
तलवों के छालों की
पीड़ा से परे हम
भ्रांति की ओर
बढ़ गए।

हम जानते हैं
आकांक्षा है जीवन विधान।
ज्ञानी चुप हैं
और देवता सो रहे
आराधित होने के संतोष में।

दर्शन और मीमांसा
कुछ स्पष्ट नहीं करते

केवल भाव हैं हमारे पास
तो हम क्यों न
ओंठ से ओंठ मिलाएँ।

मृत्यु हर दिन होती है
तो महाप्रयाण का
क्या भय?

1 जनवरी 2006

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। कविकाव्य चर्चा काव्य संगम किशोर कोना गौरव ग्राम गौरवग्रंथ दोहे रचनाएँ भेजें
नई हवा
पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।