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संकलन में—
वर्षा मंगल–डरा पक्षी

  जंगल में आग

जंगल के बीच
लहराते वृक्षों को देख
आभास हुआ
हम ही
वह बहती समीर थे।

हम चुप रहे
जब घुडसवार वहाँ पहुँचे
आग लगाने,
एक बस्ती बसाने।

हृदय स्तब्ध था,
क्योंकि हृदय रहस्यपात्र है
इस की भाषा नहीं।
और अरण्य ग्राम के सामने
हटता है।

पक्षी और पतंगें
आग के तूफ़ान में
वृक्षों के तांडवीय नृत्य
में झूल रहे थे,
आहुति बनकर।

16 जनवरी 2007

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